Friday, 8 January 2016

लखनऊ की बेलीगारद जहां है आत्माओं का निवास!


अगर आप लखनऊ में हैं और बात अगर भूत, प्रेत व आत्माओं की आ जाये, तो बेलीगारद यानी रेजीडेंसी का नाम जुबां पर जरूर आ जायेगा। जी हां ऐसा इसलिये क्योंकि एक समय था, जब शाम ढलते ही इस जगह पर लोग जाने तक से डरते थे। खास बात यह है कि बेलीगारद उस रास्ते पर स्थ‍ित है, जो पुराने लखनऊ को नये लखनऊ से कनेक्ट करता है। एक समय था, जब हजरतगंज में रहने वाले लोग रात को पुराने लखनऊ की तरफ जाने से डरते थे, कारण था बेलीगारद। रोंगटे खड़े करने वाली एक सच्ची कहानी बात 1971 की है, जब लखनऊ विश्वविद्यालय के लाल बहादुर शास्त्र हॉस्टल में पढ़ने वाले तीन दोस्तों के बीच शर्त लगी कि किसमें इतनी हिम्मत है, जो रेजीडेंसी के अंदर रात बिता सके। यहां अकेली रात बिताना हर किसी के बस की बात नहीं, क्योंकि यहां वो कब्रिस्तान है, जिसमें 1857 की जंग में मारे गये अंग्रेजों को दफनाया गया था। सभी कब्रों पर एक-एक पत्थर लगा है और पत्थरों पर मरने वाले का नाम। खैर उन दोस्तों में से एक ने हिम्मत दिखाई और शर्त कबूल कर ली। अगले दिन सफेद रंग के कुर्ते पैजामे में तीनों दोस्त विश्वविद्यालय से निकले और नदवा कॉलेज और पक्का पुल के रास्ते से होते हुए रेजीडेंसी पहुंचे। रात के करीब 11 बजे थे, सन्नाटा छाया हुआ था। अधपक्की सड़क पर महज एक दो इक्के (पुराने जमाने में चलने वाले तांगे) ही नजर आ रहे थे। तीनों दोस्त बेलीगारद के अंदर पहुंचे। उन दिनों बेलीगारद के चारों ओर बाउंड्री वॉल टूटी हुई थी, कोई भी आसानी से अंदर जा सकता था। रात के बारह बजते ही तीन में से दो उठे और बोले, ठीक है, दोस्त हम चलते हैं, सुबह मिलेंगे। अपने दोस्त को सूनसान कब्रिस्तान में अकेला छोड़कर दोनों चले आये। [हॉन्टेड हाउस] सभी के होश फाख्ता हो गये दूसरे दिन दूसरे दिन सुबह उठते ही जब दोनों दोस्त रेजीडेंसी पहुंचे, तो वहां दोस्त नहीं, उसकी लाश मिली। पुलिस के डर से दोनों फरार हो गये। बाद में पुलिस ने रेजीडेंसी पहुंच कर युवक की लाश को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों के हवाले कर दी। पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट में पता चला कि युवक की मौत हार्ट अटैक से हुई। हार्ट अटैक की वजह वो डर बताया गया, जिसका सामना भूत के साय में वह उस रात कब्रिस्तान में नहीं कर पाया।

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